Wednesday, March 26, 2008

तमन्ना है हम

काँटों को पनाह देते है हम
और फूल बना देते है हम
वह राज़ की बातें करते है
हमराज़ बना लेते है हम
जो दिल में है उसे दिल ही में रखना
क्या हाल है उनका सूरत से बता देते है हम
जान कर जो ख़ुद से अन्जान बना करते है
हर अक्स को उनका आईना बना देते है हम
वो आए तो पलकें बिछा के बैठे है
न आए तो भी खुशगवार है हम
इस नासाज़ दुनिया में
क्या उम्मीद और क्या हौसला
कहीं किसी के दिल में दबी कोई तमन्ना है हम

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