Sunday, March 23, 2008

आना नहीं हुआ

सूरत दिखाने आए की आना नहीं हुआ
मिलकर भी तुमसे मिलाना नहीं हुआ
शायद लगेगी दिल्लगी दिल की लगी मेरी
कह दोगे मिले कोई ज़माना नहीं हुआ
आना तेरा अचानक सिम सिम के खुलने सा
जान भी यकायक था
भुलाना नहीं हुआ
जी भर के तेरे आने की खुशी न मना सके
सेहत का तेरी जाम उठाना नहीं हुआ
जानती हूँ ये आधा दिल यहाँ आधा तेरे वहाँ
हम आधे अधुरों का ठिकाना नहीं हुआ
मना बँटा हुआ है ऐ दोस्त तेरा प्यार
मज़बूरी थी
रुकने का बहाना नहीं हुआ
क्यों दुनियादारी हमको सिखाने लगे हो आज
लगता हे तुमसे बढ़ कर कोई सयाना नहीं हुआ
तेरी नज़र क्या खूब गज़ब चोट कर गई
दिल पहले कभी अपना निशाना नहीं हुआ
मरने के बाद मेरे दुनिया कहेगी ये
तमन्ना के जैसा कोई दीवाना नहीं हुआ

1 comment:

Chris said...

kyo ho aakhir bate hue,
ki tumhara humse rishta
aaj poora nahi hua?
Kyo hai meri umeede poori
jab tumhara ji aadha umadh chala?
Kya khata hui, ya zindagi ne kya karvat badli; jo aaj tumhara adhura hi aana hua!!??
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