ख्यालो के आस पास रहते है.......
फ़िर भी सपने उदास रहते है .......
गर इतेफाक्न मुस्कुरा भी दिए .....
तो इन्तेकामन उदास रहते है......
यूं ही दिन गुजरते है कभी ......
हम कुछ ही दिनों को ख़ास रखते है
आंखों में अश्क आ भी जाए कभी....
उन्हें भी हँसी के साथ रखते है....
ख्यालो के आस पास रहते है.....
फ़िर भी सपने उदास रहते है......
फ़िर भी सपने उदास रहते है .......
गर इतेफाक्न मुस्कुरा भी दिए .....
तो इन्तेकामन उदास रहते है......
यूं ही दिन गुजरते है कभी ......
हम कुछ ही दिनों को ख़ास रखते है
आंखों में अश्क आ भी जाए कभी....
उन्हें भी हँसी के साथ रखते है....
ख्यालो के आस पास रहते है.....
फ़िर भी सपने उदास रहते है......
2 comments:
Khayal jane kyo dil ke
roshan diye ko jala-bujha ke
khlte hai, kash vo jaan pate
ki unme unki shama siskiya leti rehti hai!!
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Amazingly simple poetry on your part! Keep writing. God Bless. Happy Holi.
Regards,
Chris.
hi nice poem , ye tumne likhi hai. that's great yar.
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